Tuesday, August 4, 2020

Real_Ram

असली राम कौन है ?
राम शब्द का अभिप्राय प्रभु से होता है
क्योंकि अगर हम राम शब्द का अभिप्राय केवल भगवान श्री राम जो कि द्वापर युग में ही आए थे उनसे माने तो सतयुग में भी अभिवादन के लिए राम राम ही कहा जाता था जब व्यक्ति एक दूसरे से मिलते थे राम-राम ने उच्चारण करते थे कहते थे
 राम राम जी राम राम जी श्री राम भगवान द्वापर युग में आए विष्णु अवतार के रूप में दशरथ जी के यहां जन्म लिया तथा अपनी पूरी जीवन लीला करके श्री राम प्रभु के रूप में विख्यात हुए
परंतु जिन्होंने सारी सृष्टि की रचना की है जिसने सारे ब्रह्मांड को रचा है जिसने ब्रह्मा विष्णु महेश को भी रचा है तथा उन्हीं की कृपा से सभी को अपना कर्तव्य एवं आयु प्राप्त हुई है वह पूर्ण परमात्मा कबीर देव है जिनका प्रमाण पवित्र ऋग्वेद मंडल नंबर 9 सूक्त 82 के मंत्र नंबर 1 और 2 में बताया गया है तथा उनका नाम कबीर देव है यह भी ऋग्वेद में वर्णित है श्री राम भगवान माता के गर्भ से आए थे जबकि पूर्ण परमात्मा कबीर साहिब जी से सह शरीर आते हैं और सह शरीर ही जाते हैं इसलिए वही पूर्ण परमात्मा है तथा चारों युगों में उनका नाम कुछ इस प्रकार होता है
सतयुग में सत सुकृत नाम होता है द्वापर में मुनिंद्र नाम होता है त्रेता में करुणामय नाम होता है तथा कलयुग में अपने वास्तविक नाम कबीर देव के नाम से पूर्ण परमात्मा प्रकट होते हैं
तथा यह ही अविनाशी परमात्मा है
क्योंकि श्री देवी भागवत पुराण में स्कंद तीन पृष्ठ नंबर 123 पर लिखा है कि श्री विष्णु जी श्री महेश जी तीनों स्वीकार करते हैं कि हमारा तो आविर्भाव तथा तिरोभाव हुआ करता है यानी हम भी जीवन और मरण के बंधन में बंधे हुए हैं हम भी मुक्त नहीं है यथार्थ अविनाशी नहीं है तो बाकी देवता और अन्य तो हो ही नहीं सकते 

इन सभी तथ्यों से यह तो साफ हो गया है कि पूर्ण परमात्मा कबीर देव है जो वास्तव में अविनाशी हैं जिनका जन्म मरण नहीं होता है तथा वह स्वेच्छा से अपने लोक से गमन कर के प्रति लोगों की और आते हैं तथा सर्वर लोगों में गति करके आ करके अपनी अच्छी आत्माओं को मोक्ष का रास्ता दिखा कर उन्हें मूल मंत्र देकर मर्यादा में रहकर भक्ति करवा कर उनके जीवन का कल्याण करते हैं

Wednesday, July 15, 2020

CoronaLikeEpidemic

महामारी क्यों आती है :-जब जिस देश में अथवा स्थान पर पुण्य का ह्रास तथा पाप की अधिकता होती है तथा मानव राक्षसी कार्यों में संलग्न हो जाता है एवं निर्दयता पूर्ण आचरण करने लग जाता है तब उस देश एवं स्थान पर ऐसी बीमारियां अथवा महामारी प्रवेश करती है जिन से बच पाना मनुष्य के लिए नामुमकिन सा हो जाता है अथवा उन बीमारियों से निजात पाने के लिए कोई दवा कारगर नहीं साबित होती है तथा उस बीमारी से उठी परेशानियों का सामना हमें प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष दोनों रूप से करना पड़ता है यह बीमारियां पुरातन काल में भी आई थी तथा वर्तमान में भी हम एक ऐसी ही महामारी का प्रकोप झेल रहे हैं जैसे कि कोरोना एक वैश्विक स्तर की महामारी है जिसे WHO ने वैश्विक लाइलाज महामारी घोषित किया है
बचने के उपाय:-लाइलाज होने के कारण उनका कहीं भी लाज हो पाना साइंस के लिए मुश्किल है मेडिकल साइंस सिर्फ से बचने के लिए कई तरीके अपनाती हैं जिससे आप उन लोगों के संपर्क में ला रहे हैं जिन्हें यह बीमारी है इसके अलावा मेडिकल साइंस में भी इसका कोई भी इलाज नहीं है

से बचने के लिए उपाय दो तरीके से इसका उपाय निकाला जा सकता है
*पहला मेडिकल साइंस के अनुसार*  
मेडिकल साइंस केवल बचने के लिए ही उपाय बता सकती हैं जैसे सैनिटाइजर का उपयोग हाथ और शरीर के लिए करना तथा मुंह पर मास्क लगाना आदि आदि कुल मिलाकर इस बीमारी से निजात पाने के लिए कोई उपाय नहीं मेडिकल साइंस के अनुसार केवल बचने के उपाय ही है


*दूसरा आध्यात्मिक रूप से अथवा सद्भक्ति से*
दूसरा आध्यात्मिक रूप से सत भक्ति करने से कई बीमारियों से निजात मिलता है जैसे कैंसर ट्यूमर एड्स आदि कई प्रकार की लाइलाज मारिया एवं महामारी से निजात मिलता है
केवल आवश्यकता होती है सद्भक्ति एवम् सद्गुरु की
अब सबसे बड़ी समस्या यह आ जाती है कि


 *सदगुरु और सद्भक्ति को कैसे पहचाने*
सद्गुरु वही होता है जो गीता अध्याय 15 श्लोक 1 से 4 तक में उल्टे लटके हुए संसार रूपी वृक्ष को जड़ से पत्तों तक गिराने वाला तत्वज्ञान बताने वाला तत्वदर्शी संत होता है
तथा कुरान शरीफ के सूरत फुरकानी 25 आयत 52 से 59 में जिस बा खबर के लिए बताया गया है उस बा खबर की खोज करने के पश्चात अथवा तत्वदर्शी संत खोज करने के पश्चात
सारे पापों से निजात मिलता है बीमारियों से निजात मिलता है घोर से घोर पाप का विनाश होता है तथा मोक्ष की प्राप्ति भी होती है
जिसका प्रमाण यजूर्वेद के अध्याय 5 के मंत्र 32 में लिखा हुआ है


समाधान के प्रत्यक्ष प्रमाण :-सत भक्ति करने से सभी पापों का विनाश एवं देहीक अध्यात्मिक तथा सांसारिक लाभ भी मिलते हैं लेकिन इसके लिए पूर्ण गुरु बनाना आवश्यक है जो कि वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज ही है जो पवित्र वेद पुराण कुरान गुरु ग्रंथ साहिब व बाइबल के अनुसार ज्ञान बता रहे हैं जो कि सभी सत ग्रंथों तो से प्रमाणित है इनमें सभी में सदगुरुदेव जी ने प्रमाणित कर दिया है कि कबीर परमेश्वर ही पूर्ण परमात्मा है तथा उनकी भक्ति करने से ही यह सभी लाभ हमें भक्ति करने के दौरान मिलते हैं 
पूर्ण परमात्मा की भक्ति करने के लिए ना किसी शुल्क का देना निशुल्क भोजन निशुल्क नाम दीक्षा किसी तरह की कोई ठगी नहीं यह भी सद्गुरु की पहचान होती है जो केवल परोपकार के लिए ही कार्य करते हैं
ऐसे कई प्रमाण है जिनकी लाइलाज बीमारियां पूर्ण परमात्मा की सत भक्ति करने से बिना किसी मेडिकल दवाइयों के ठीक हो गई तथा सांसारिक सुखों की प्राप्ति भी हुई तथा कई आध्यात्मिक लाभ भी हुए है जिनमें कुछ इस प्रकार हैं

Wednesday, July 8, 2020

KnowledgeAndScience

ज्ञान :-  ज्ञान उसे कहते हैं जो किसी वस्तु व्यक्ति अथवा स्थान के बारे में जानकारी हो उस जानकारी के ऊपर किसी व्यक्ति विशेष का दृढ़ निश्चय हो की पूर्ण रूप से वह उसे जानता है उसे ज्ञान कहा जाता है

*विज्ञान* विज्ञान उसे कहते हैं जिस ज्ञान को प्रमाण सहित प्रमाणित किया जा सके उसे विज्ञान कहते है विज्ञान तथ्यों पर व प्रमाण पर ही टिकी होती है जिसका जन विशेष नहीं सबका दृढ़ निश्चय होता है यह पूर्णतया सत्य है


तत्वज्ञान भी विज्ञान होता है फिर से शास्त्रों में संतों का ज्ञान तत्वज्ञान कहा गया है क्योंकि वह पूर्ण तरह से प्रमाणित होता है तथा व्यवहारिक रुप से भी श्रेष्ठ तथा प्रमाणित होता है यहां तत्व का अर्थ मूल भाव से होता है जिससे पर्दा पूर्ण संत एवं सद्गुरु ही उठा सकते हैं अन्य नहीं

गीता अध्याय 15 मंत्र 1 से 4 में तत्वदर्शी संत के बारे में बताया है कि उसकी प्राप्ति के पश्चात संवाद प्रणाम करके सरलता पूर्वक प्रश्न करने से वह मोक्ष मार्ग का रास्ता प्रशस्त करता है तथा उस लोक में ले जाता है जो गीता के अध्याय 18 श्लोक 62, वें में लिखा हुआ है सनातन परमधाम शाश्वत स्थान आदि नामों से बताया गया है जो विनाश में नहीं आता है नहीं वहां की जीवात्मा जन्म मृत्यु के चक्र में हैं जहां  जाने के बाद जन्म मृत्यु नहीं होता सदा सदा के लिए सुख एवं जन्म जन्म मरण से छुटकारा मिलता है


Saturday, July 4, 2020

कबीरपरमेश्वर_की_लीलाएं DivinePlay_Of_GodKabir

कबीर परमेश्वर जी द्वारा अपने जीवन में  लीलाएं की जो अद्भुत एवं चमत्कारिक थी उन्होंने अपनी प्यारी आत्माओं का कल्याण किया उन्हें सत भक्ति दिखाकर मोक्ष मार्ग प्रदान किया इन्हीं लीलाओं में कुछ इस प्रकार हैं दामोदर सेठ के डूबते हुए जहाज को बचाना सेठ धर्मदास जी को माया के जाल से छुड़ाना मीराबाई को श्री कृष्ण से ऊपर परम शक्ति का ज्ञान कराकर मुक्त करवाना संत रविदास जी को ज्ञान देकर उनका मार्गदर्शन करना स्वामी रामानंद जी को ज्ञान देकर जातिभेद मिटाना वेश्या गणिका को ज्ञान देकर सद्भक्ति देकर उसका मोक्ष करवाना जीवा दत्ता के सूखे पेड़ को फिर से हरा-भरा करना आदरणीय गरीबदास जी को 10 वर्ष की उम्र में सद्भक्ति एवं ज्ञान कराना आदि कई लीलाएं 

Wednesday, July 1, 2020

true.devotion

saint Rampal Ji Maharaj

  •  प्रश्न:- सद्भक्ति क्यों करना जरूरी है ?
      उत्तर:- सत भक्ति इसलिए जरूरी है क्योंकि हमें  जीवन में आर्थिक आध्यात्मिक व शारीरिक लाभ मिले जिसके जीवन में अत्यंत आवश्यक है

  • सत भक्ति के लाभ 
आज हम लाभ के लिए भटक रहे हैं कि हमें किसी भी तरह से आध्यात्मिक आर्थिक मैं मानसिक शारीरिक लाभ मिले लेकिन यह सब भी बिना परमात्मा की कृपा के बिना सत भक्ति के बिना पूर्ण गुरु की शरण में गए हमें नहीं मिल सकते क्योंकि पूर्ण गुरु शक्तियों के से परिचित करवाता है जिनसे यह लाभ प्राप्त होते हैं इसीलिए श्रीमद्भगवद्गीता में कहां गया है
  • श्रीमद् भगवतगीता से प्रमाण
श्रीमद भगवद गीता अध्याय 16 मंत्र 23 और 24 के अनुसार जो भी व्यक्ति शास्त्र अनुकूल भक्ति नहीं करता है उसे न तो सिद्धि प्राप्त होती है नहीं उसके कार्य सिद्ध होते हैं नहीं उसे कोई लाभ मिलता है अतः हमें
  •          
  • भक्ति करनी चाहिए तथा शास्त्र अनुकूल भी होनी चाहिए ताकि हमें वर्तमान में जी रहे जीवन में भी सुख मिले और मृत्यु उपरांत जम के दुतो से छुटकारा तथा सतलोक उस सनातन परमधाम में वास मिले जा वहां जाकर व्यक्ति जन्म मरण के चक्कर में दोबारा नहीं पड़ता है तथा पृथ्वी लोक पर उसका आगमन पुनः नहीं होता है
        
  • पूर्ण परमात्मा के मंत्र का जाप का प्रमाण
भगवत गीता में वर्णित गीता अध्याय 17 श्लोक 23 में लिखा हुआ है कि ओम तत्सत इस तरह से तीन प्रकार से पूर्ण गुरु से प्राप्त मंत्र सर्व सुखो कथा पूर्ण मोक्ष के लिए अत्यंत आवश्यक है इसीलिए भक्ति करना आवश्यक है हमें भक्ति करने पर सर्व लाभ एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है

वर्तमान में पूर्ण सद्गुरु एवं उनकी पहचान
           

  • श्रीमद भगवत गीता के अनुसार पूर्ण सद्गुरु अध्याय 15 श्लोक 1 के अनुसार उल्टे लटके हुए संसार रूपी वृक्ष को जड़ से पत्तो तक गिनाने वाला वह उसके सभी भाग का वर्णन करने वाला गुरु ही पूर्ण गुरु होता है तथा उसके अनुसार बताई गई साधना से सांसारिक सुख एवं आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं वर्तमान में केवल संत रामपाल जी महाराज ही पूर्ण संत है जो शास्त्र अनुसार शास्त्र अनुकूल भक्ति बता रहे हैं तथा उनसे मिलने वाले लाभों का वर्णन भी बता रहे हैं से नाम उपदेश लेकर हमें उन अध्यात्मिक शक्तियों का आभास होता है जो आज दिन तक गुप्त थी
अधिक अधिक जानकारी के लिए देखिए साधना टीवी चैनल 7:30 से 8:30 बजे तक तथा पढ़िए ज्ञान गंगा पुस्तक तथा डाउनलोड कीजिए से फ्री में संत रामपाल जी महाराज जी की वेबसाइट से

Tuesday, June 16, 2020

अल्लाह कबीर ही पूर्ण परमात्मा है - कुरान शरीफ

पवित्र कुरान प्रमाणित करती है कि अल्लाह कबीर साहेब ही सूरत फुरकानी 25 आयत 52 में लिखा है कि कबीर साहेब ही कबीर अल्लाह तथा  पूर्ण प्रभु है तथा कबीर अल्लाह के लिए अधिक रहना
तथा संघर्ष करना है उसके लिए
तथा  सूरत फुरकानी 25 के 58 में भी लिखा है
हजरत मोहम्मद जी जिसे अपना गुरु मानते हैं पर कुरान का ज्ञान दाता अल्लाह प्रभु किसी और पूर्ण प्रभु की तरफ संकेत करता है जिसमें कहता है कि हे पैगंबर उस कबीर परमात्मा पर विश्वास रख जो तुझे जिंदा महात्मा के रूप में आकर मिला था वह कभी मरने वाला नहीं है अर्थात वास्तव में अविनाशी है तारीफ के साथ उसकी पकी का गुणगान कीए जा वह कबीर अल्लाह पूजा के योग्य है तथा उसके उपासको के सर्व वह पापों को नष्ट करने वाला है
अधिक जानकारी के लिए देखिए साधना टीवी चैनल 7:30 से 8:30 तक ईश्वर टीवी चैनल 8:30 से 9:30 तक

Tuesday, June 9, 2020

पूर्ण परमात्मा कबीर साहिब जी के चमत्कार miracles of supreme God Kabir Sahib

💥"सिकंदर लोधी बादशाह के जलन का असाध्य रोग ठीक करना"
कबीर परमेश्वर जी ने दिल्ली के बादशाह सिकंदर लोधी के जलन का असाध्य रोग आशीर्वाद मात्र से ठीक कर दिया। वह रोग जो किसी काजी, मुल्ला के जंत्र-मंत्र से भी ठीक नहीं हुआ था।

💥"स्वामी रामानंद जी को जीवित करना"
दिल्ली के बादशाह सिकंदर लोधी ने स्वामी रामानंद जी की गर्दन तलवार से काट दी थी। कबीर साहेब जी ने देखा कि रामानंद जी का धड़ कहीं और सिर कहीं पर पड़ा था। तब कबीर साहेब ने मृत शरीर को प्रणाम किया और कहा कि गुरुदेव उठो। दूसरी बार कहते ही सिर अपने आप उठकर धड़ पर लग गया और रामानंद जी जीवित हो गए।
💥"मृत लड़के कमाल को जीवित करना"
शेखतकी का कहना था कि अगर कबीर अल्लाह है, तो किसी मुर्दे को जीवित कर दे तो अल्लाह मान लूंगा। सुबह एक 10-12 वर्ष की आयु के लड़के का शव पानी में तैरता हुआ आ रहा था। शेखतकी ने जंत्र-मंत्र से प्रयत्न किया लेकिन लड़का जीवित नहीं हुआ। तब कबीर साहेब ने कहा कि हे जीवात्मा जहाँ भी है, कबीर हुक्म से मुर्दे में प्रवेश कर और बाहर आ। इतना कहा ही था कि शव में कम्पन हुई तथा जीवित होकर बाहर आ गया।
💥"भैंसे से वेद मन्त्र बुलवाना"
एक समय तोताद्रि नामक स्थान पर सत्संग था। सत्संग के पश्चात भण्डारा शुरू हुआ। भंडारे में भोजन करने वाले व्यक्ति को वेद के चार मन्त्र बोलने पर प्रवेश मिल रहा था। कबीर साहेब की बारी आई तब थोड़ी सी दूरी पर घास चरते हुए भैंसे को बुलाया। तब कबीर जी ने भैंसे की कमर पर थपकी लगाई और कहा कि भैंसा पंडित इन पंडितों को वेद के चार मन्त्र सुना दे। भैंसे ने वेद के मंत्र सुना दिए।
💥"गोरखनाथ से गोष्ठी"
एक बार कबीर परमेश्वर जी और गोरखनाथ जी की गोष्ठी हुई। गोरखनाथ जी गंगा नदी की ओर चल पड़ा। उसमें जा कर छलांग लगाते हुए कबीर जी से कहा कि मुझे ढूंढ दो मैं आपका शिष्य बन जाऊँगा। गोरखनाथ मछली बन कर गए। कबीर साहेब ने उसी मछली को पानी से बाहर निकाल कर सबके सामने गोरखनाथ बना दिया। तब गोरखनाथ कबीर जी के शिष्य बने।
💥"मृत गऊ को जीवित करना"
सिकंदर लोधी ने एक गऊ के तलवार से दो टुकड़े कर दिये। गऊ को गर्भ था और बच्चे के भी दो टुकड़े हो गए। 
तब सिकंदर लोधी राजा ने कहा कि कबीर, यदि तू खुदा है तो इस गऊ को जीवित कर दे अन्यथा तेरा सिर भी कलम कर (काट) दिया जाएगा। साहेब कबीर ने एक बार हाथ गऊ के दोनों टुकड़ों को लगाया तथा दूसरी बार उसके बच्चे के टुकड़ों को लगाया। उसी समय दोनों माँ-बेटा जीवित हो गए। साहेब कबीर ने गऊ से दूध निकाल कर बहुत बड़ी देग (बाल्टी) भर दी
तथा कहा - 
गऊ अपनी अम्मा है, इस पर छुरी न बाह। 
गरीबदास घी दूध को, सब ही आत्म खाय।।
चुटकी तारी थाप दे, गऊ जिवाई बेगि।
गरीबदास दूझन लगी, दूध भरी है देग।।

💥"सेउ की कटी हुई गर्दन को जोड़ना"
परमात्मा कबीर ने अपने भक्त की कटी हुई गर्दन वापिस जोड़ दी थी।
आओ सेउ जीम लो,यह प्रसाद प्रेम।
सिर कटते हैं चोरों के,साधों के नित्य क्षेम।।
ऐसी-2 बहुत लीलाएँ साहेब कबीर (कविरग्नि) ने की हैं जिनसे यह स्वसिद्ध है कि ये ही पूर्ण परमात्मा हैं। सामवेद संख्या नं. 822 तथा ऋग्वेद मण्डल 10 सूक्त 162 मंत्र 2 में कहा है कि कविर्देव अपने विधिवत् साधक साथी की आयु बढ़ा देता है।
💥"काशी का अद्भुत भंडारा"
शेखतकी मुस्लिम पीर ने कबीर साहेब को नीचा दिखाने के लिए 3 दिन के भंडारे की कबीर साहेब के नाम से सभी जगह झूठी चिठ्ठी डलवाई थी कि कबीर जी तीन दिन का भंडारा करेंगे, सभी आना। भोजन के बाद एक मोहर, एक दोहर भी देंगे। कबीर साहेब ने तीन दिन का मोहन भंडारा कराया और लाखों की संख्या में उनके अनुयायी हुए।
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Saturday, June 6, 2020

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कबीर साहेब द्वारा सर्वानंद को शरण में लेना !
पंडित सर्वानंद ने अपनी माँ से कहा कि मैंने सभी ऋषियों को शास्त्रार्थ में हरा दिया है तो मेरा नाम सर्वाजीत रख दो लेकिन उनकी माँ ने सर्वानंद से कहा कि पहले आप कबीर साहेब को शास्त्रार्थ में हरा दो तब आपका नाम सर्वाजीत रख दिया जाएगा। जब सर्वानंद कबीर साहेब के पास शास्त्रार्थ करने पहुँचे तो कबीर साहेब ने कहा कि आप तो वेद-शास्त्रों के ज्ञाता हैं मैं आपसे शास्त्रार्थ नहीं कर सकता। तब सर्वानंद ने एक पत्र लिखा कि शास्त्रार्थ में सर्वानंद जीते और कबीर जी हार गए। उस पर कबीर साहेब जी से अंगूठा लगवा लिया। लेकिन जैसे ही सर्वानंद अपनी माँ के पास जाते तो अक्षर बदल कर कबीर जी जीते और पंडित सर्वानंद हार गए ये हो जाते। ये देखकर सर्वानंद आश्चर्य चकित हो गए और आखिर में हार मानकर सर्वानंद ने कबीर साहेब की शरण ग्रहण की। 


सम्मन को पार करना !
सम्मन बहुत गरीब था। जब कबीर परमात्मा का भक्त बना। तब परमात्मा के आशीर्वाद से दिल्ली का महान धनी व्यक्ति हो गया, परंतु मोक्ष की इच्छा नहीं बनी।सम्मान ने अपने परमेश्वर रूप सतगुरु के लिए अपने बेटे की कुर्बानी की थी। जिस कारण अगले जन्म में नौशेरखान शहर के राजा के घर जन्मा। फिर ईराक देश में बलख नामक शहर का राजा अब्राहिम सुल्तान बना। परमात्मा ने उस आत्मा के लिए अनेकों लीलाएं की और उसका उद्धार किया
दादू जी का उद्धार !
सात वर्ष की आयु के दादू जी को परमात्मा कबीर जी जिंदा महात्मा के रूप में मिले व ज्ञान समझाया और सतलोक दिखाया।इसलिए परमात्मा कबीर जी की महिमा गाते हुए दादू  जी कहते हैं :-जिन मोकूं निज नाम दिया, सोई सतगुरु हमार ।दादू दूसरा कोई नहीं, कबीर सिरजनहार ।।
मीरा बाई को शरण में लेना
मीरा बाई पहले श्री कृष्ण जी की पूजा करती थी। एक दिन संत रविदास जी तथा परमात्मा कबीर जी का सत्संग सुना तो पता चला कि श्री कृष्ण जी नाशवान हैं। समर्थ अविनाशी परमात्मा अन्य है। संत रविदास जी को गुरू बनाया। फिर अंत में कबीर जी को गुरू बनाया। तब मीरा बाई जी का सत्य भक्ति बीज का बोया गया।गरीब, मीरां बाई पद मिली, सतगुरु पीर कबीर। देह छतां ल्यौ लीन है, पाया नहीं शरीर।।
संत गरीबदास जी को शरण में लेना
परमात्मा कबीर जी ने दस वर्षीय बालक गरीबदास जी को सतलोक के दर्शन करवाए, ज्ञान समझाया और अपनी शरण में लिया और सतलोक का वासी किया।शेखतकी के अत्याचारों को माध्यम बना लाखों जीवों का उद्धार करना
स्वामी रामानंद जी से ज्ञान चर्चा के लिए आए गोरखनाथ जी से परमेश्वर कबीर जी ने खुद चर्चा की और गोरखनाथ जी को पराजित कर सत्य ज्ञान से परिचित करवा मोक्ष की राह दिखाई।
तेरह गाड़ी कागजों को लिखना    
एक बार दिल्ली के बादशाह ने कहा कि कबीर जी ढ़ाई दिन में तेरह गाड़ी कागजों को लिख दे तो मैं उनको परमात्मा मान जाऊंगा । परमात्मा ने गाड़ियों में रखे कागजों पर अपनी डण्डी घुमा दी। उसी समय सर्व कागजों में अमृतवाणी सम्पूर्ण आध्यात्मिक ज्ञान लिख दिया। राजा को विश्वास हुआ।
धर्मदास को सदमार्ग दिखाना
भक्त धर्मदास जी बांधवगढ़ के धनी सेठ थे। देवी तथाशिव-पार्वती की पूजा, तीर्थों व धामों पर जाकर स्नान करना आदि शास्त्रविरूद्ध साधना किया करता था। धर्मदास जी जब तीर्थ यात्राओं पर निकले तो परमात्मा कबीर जी जिंदा महात्मा के वेश में उन्हें मिले और बार-बार ज्ञान की चोट की, सतलोक के दर्शन कराए और अपनी शरण में लिया।
परमपिता परमेश्वर ने अपने बच्चों के कल्याण के लिए अनेकों रूप बनाए तथा उनके सामने जाकर उन्हें तत्वज्ञान दिया उनको हर संभव मदद की तथा मोक्ष मंत्र देकर उनका कल्याण किया
अधिक जानकारी के लिए देखिए साधना टीवी चैनल 7:30 से 8:30 तक ईश्वर टीवी चैनल 8:30 से 9:30 तक

Friday, June 5, 2020

623rd_GodKabir_PrakatDiwas। 5 June 2020 Kabir parmeshwar prakat Divas

#623rd_GodKabir_PrakatDiwas
 काशी में एक लहरतारा तालाब था। गंगा नदी का जल लहरों के द्वारा नीची पटरी के ऊपर से उछल कर एक सरोवर में आता था। इसलिए उस सरोवर का नाम लहरतारा पड़ा। उस तालाब में बड़े-2 कमल के फूल उगे हुए थे। नीरू-नीमा(नि:सन्तान दम्पत्ति थे) ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने के लिए गए हुए थे। वहां नीरू - नीमा को कमल कद फूल पर शिशु रूप में कबीर परमात्मा मिले थे।
बालक रूप में कबीर परमात्मा को लेकर जब नीरू तथा नीमा अपने घर जुलाहा मोहल्ला आए। जिस भी नर व नारी ने नवजात शिशु रूप में परमेश्वर कबीर जी को देखा वह देखता ही रह गया। परमेश्वर का शरीर अति सुन्दर था। आँख जैसे कमल का फूल होए, घुँघराले बाल, लम्बे हाथ, लम्बी-2 अँगुलियाँ, शरीर से मानो नूर झलक रहा हो। पूरी काशी नगरी में ऐसा अद्धभुत बालक नहीं था।
गरीब ,काशी उमटी गुल भया, मोमन का घर घेर।
कोई कहै ब्रह्मा विष्णु हैं, कोई कहै इन्द्र कुबेर।।
पूरी काशी परमेश्वर कबीर जी के बालक रूप को देखने को उमड़ पड़ी। बच्चे को देखकर कोई कह रहा है था कि ये बालक ब्रह्मा का अवतार है कोई कह रहा था साक्षात् विष्णु भगवान आये हैं, कोई इन्द्र कुबेर कह रहा था।
जब काजी कुरान लेकर शिशु रूप कबीर परमेश्वर का नामंकन करने गए तब कुरान शरीफ खोली तो उसमें सर्व अक्षर कबीर-कबीर-कबीर-कबीर हो गए। कबीर परमेश्वर शिशु रूप में बोले मैं कबीर अल्लाह अर्थात् अल्लाहु अकबर, हूँ। मेरा नाम ‘‘कबीर’’ ही रखो।
काजी गये कुरान ले, धरि लड़के का नाम।
अक्षर अक्षर में फुरया, धन कबीर बलि जांव।।
सकल कुरान कबीर है, हरफ लिखे जो लेख।
काशी के काजी कहै, गई दीन की टेक।।
कबीर परमेश्वर सन् 1398, ज्येष्ठ मास की पूर्णमासी को ब्रह्म मुहूर्त में अपने निज धाम सतलोक से चलकर आए और काशी के लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर शिशु रूप धारण करके विराजमान हुए। जहाँ से नीरू-नीमा उठा कर ले गये और पुत्रवत पालन किया।
कबीर, ना मेरा जन्म न गर्भ बसेरा, बालक बन दिखलाया।
काशी नगर जल कमल पर डेरा, तहाँ जुलाहे ने पाया।।

कबीर परमात्मा का जन्म माँ के गर्भ से नहीं होता। वह स्वयं सतलोक से सशरीर आते हैं अपना तत्वज्ञान देने और मोक्ष प्रदान करने।
संत गरीबदास जी की वाणी है -
न सतगरु जननी जने, उनके मां न बाप।
पिंड ब्रह्मंड से अगम है, जहां न तीनों ताप।।
🎊कबीर परमेश्वर का शरीर हाड़ मांस से बना नहीं है। वह अविनाशी परमात्मा हैं। कबीर परमात्मा जन्म-मृत्यु से परे हैं। वह सशरीर प्रकट हुए थे और सशरीर मगहर से अपने सतलोक गए थे।
हाड चाम लोहू नहीं मोरे, जाने सत्यनाम उपासी।
तारन तरन अभै पद दाता, मैं हूं कबीर अविनासी।।
अधिक जानकारी के लिए देखिए साधना टीवी चैनल 7:30 से 8:30 तक ईश्वर टीवी चैनल 8:30 से 9:30 तक

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Thursday, June 4, 2020

#5thJuneKabirPrakatDiwas

कबीर जयंती और कबीर प्रकट दिवस में अंतर
जो जन्मता है उसकी जयंती मनाई जाती है, जो अजन्मा है, स्वयंभू है, वह प्रकट होता है। कबीर साहेब, अमर पुरूष लीला करते हुए बालक रूप धारण करके स्वयं प्रकट होते हैं।
चारों युगों में सिर्फ कबीर परमात्मा के प्रकट होने के ही प्रमाण हैं
सतयुग में सत सुकृत नाम से,
त्रेता में मुनीन्द्र नाम से, 
द्वापर में करुणामय नाम से,
और कलयुग में अपने असली नाम कबीर नाम से प्रकट होते हैं।
बाकी सभी देव मां के गर्भ से जन्म लेते हैं।
 सिर्फ कबीर जी का ही प्रकट दिवस क्यों ?*
   ऋग्वेद मंडल नंबर 9 सूक्त 1 मंत्र 9 में प्रमाण है कि वह परमात्मा सतलोक से शिशु रूप धारण करके प्रकट होता है और कुंवारी गायों के दूध से उसकी परवरिश होती है ।
ऋग्वेद  मंडल नंबर 9 सूक्त 96 मंत्र 17 में भी वर्णन है कि पूर्ण परमात्मा कबीर जी जान बूझकर बालक रूप में प्रकट होते है।
इसलिए उनका प्रकट दिवस मनाया जाता है ।
जयंती और प्रकट दिवस में अंतर जानें
जो मां के गर्भ से जन्म लेते हैं, उनका जन्म दिवस मनाया जाता है लेकिन पूर्ण परमात्मा कबीर जी का प्रकट दिवस मनाया जाता है क्योंकि वह अविनाशी परमात्मा है।
सभी देवों का जन्म दिवस तो आखिर कबीर जी का प्रकट दिवस क्यों ?
पूर्ण परमात्मा कबीर जी के अलावा सभी देव जन्म-मृत्यु में हैं और प्रकट दिवस सिर्फ अविनाशी परमात्मा का ही मनाया जाता है क्योंकि वह जन्म नहीं लेते बल्कि हर युग में कमल के फूल पर प्रकट होते हैं।

Wednesday, June 3, 2020

#KabirPrakatDiwasNotJayanti

सभी देवों का तो जन्म दिवस मनाया जाता है तो फिर कबीर जी का प्रकट दिवस क्यों मनाया जाता है 
क्योंकि कबीर परमेश्वर जी किसी माता के गर्भ से नहीं आए वे अविनाशी परमात्मा है वैसे अपने निजी लोक सतलोक से चल कर पृथ्वी पर सह शरीर प्रकट होते हैं
तथा अपने अच्छी आत्माओं को पुण्य आत्माओं को सतलोक का ज्ञान देकर वेदों और गीता का तत्वज्ञान बताकर उस में छुपे रहस्यों का ज्ञान उजागर करके उन्हें अमृत्व से परिचित करवाते हैं तथा जन्म मृत्यु से छुटकारा कैसे पाया जाए वह मूल मंत्र क्या है सारनाम की वास्तविकता सभी का ज्ञान कराकर उसे भक्ति करवा कर अपने निज लोक सतलोक में स्थान प्राप्त करवाते हैं
तथा वह परमात्मा घोर से घोर पाप का भी विनाश कर सकते हैं किसी भी रोग का नाश कर सकते हैं तथा काल के बंधनों से छुड़वा सकते हैं इन सभी का प्रमाण यजुर्वेद मंडल नंबर 9सूक्त 1 मंत्र 9 ! सूक्त 82मंत्र 1और2 सूक्त 86 के मंत्र 26और 27 , सूक्त 96 के मंत्र 17 से 20 तक यजुर्वेद अध्याय 05 मंत्र 36 में
सामवेद कांड 4 अनूवाक 1 मंत्र 7 और कई स्थानों पर प्रमाण है
Saint Rampal Ji Maharaj
Kabir Is God  
5 जून 2020 कबीर परमेश्वर प्रकट दिवस
साधना टीवी पर मेगा सत्संग सुबह 9:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक

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